परवीन रंगीली की कव्वाली में उमडे दर्शक-ख्वाजा की जोगन ने जगाई सुफियाना कलामों की अलख

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-नातिया कलामों, हम्द, और गजलों की मधुर प्रस्तुतियों से सजाई कव्वाली की शाम,  घोला कौमी एकता के साथ राग देश का रंग-आज दिल्ली की चंचल भारती पेश करेंगी गायकी
जोधपुर।
देश विदेश में ख्वाजा की जोगन के नाम से मशहूर मुंम्बई की कव्वाल परवीन रंगीली ने शनिवार शाम जयनारायण व्यास स्मृति भवन में छह दिवसीय संगीत समारोह की पहली शाम अपने निराले अंदाज में धमाकेदार आर्केस्ट्ा के साथ नातिया कलामों, हम्द और गजल के साथ देश भक्ति से लबरेज शेरो शाईरी की चाशनी घोलते हुए काफी अरसे बाद हाउस फुल हुए टाउनहॉल में मौजूद श्रोताओं को जैसे धन्य कर दिया।
पिछले तीन दशक से अधिक समय से अजमेर ख्याजा के दरबार में बिला नागा कव्वालियों की प्रस्तुति देने वाली देश की एक मात्र महिला कव्वाल होने के साथ साथ भारत में ही नहीं यूएसए, यूएससआर, यूके, यूरोप, जर्मनी, आस्ट्ेलिया सहित खाडी के देशों में सैकडों प्रोग्राम की प्रस्तुति देने वाली रंगीली ने कार्यक्रम का आगाज ख्वाजा गरीब नवाज को समर्पित नातिया कलाम इश्क है ये तमाशा नही ंके साथ किया। समय के साथ बदलते साज ओ सामान से लबरेज अपनी धुनों में आधुनिक साजों का इस्तेमाल करते हुए ऑक्टोपैड के बेस ऑर झंकार के साथ तबले, नाल और डफली की ताल पर रंगीली ने अपनी प्रस्तुति पर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। करीब दस साजिंदों के साथ सुर्ख लाल रंग का सुनहरी किनारी वाला जोडा पहने, गले में हार, हाथों में कंगन और अंगुलियों में ख्याजा के नाम की अंगूठियां धारण किए रंगीली ने जब अपने घुटनों पर खडे होते हुए आर्केस्ट्ा की धुन पर झूमते, अदाकारी दिखाते  सूफी कलामों की जब झडी लगा दी तो श्रोता भाव विभोर होकर उसे एक टक देखते ही रह गए।
ऐसा हिंदुस्तान बना दे मौला
अपनी प्रस्तुति में देश भक्ति और कौमी एकता के रंग मिलाते हुए उसने हिंदू मुस्लिम भाई भाई बन कर रहे, ऐसा हिंदुस्तान बनादे मौला, मैं सोचने लगूं तो मदीना दिखाई दे, इंश्क है ये तमाशा नहीं है, हज कमेटी के क्यों चक्कर लगाउं, क्यों कराउं सिफारिश किसी की, अल्लाह मेरे बदन पे दो पर लगा दे, हर दिन मदीना जाउं बिन पासपोर्ट के जैसे शेर सुनाते हुए श्रोताओं से बार बार दाद पाई। रंगीली ने अपने मशहूर एलबम ख्याजा की जोगन, चांद रजब का अर्श पे चमका, छिडकते हैं आप पर जान ख्वाजा जैसे कलामों की प्रस्तुति से श्रोता अभिभूत हो गए।
जो परोसा जाता है वहीं तो खाते हैं
रंगीली ने इससे पहले बातचीत में बताया कि आज के युवा वहीं पसंद करते हैं जो उनको सुनाया जाता है, जैसा परोसा जाएगा वेसा ही हम खाएंगे। लोग संस्कृति को भूल कर रैप, जॉज और रॉक की तरफ भाग रहे हैं, लेकिन आखिर सभी को घूम कर फिर से अपनी जडों की तरफ आना होगा।
सिफारिश से लिया तो अवार्ड क्या लिया
करीब तीन दशक से कव्वाली गा रही परवीन से जब पूछा गया कि गीत संगीत में इतने अवार्ड बांटे जा रहे हैं कलाकारों का पदमश्री व पद्मभूषण से नवाजा जा रहा है, क्या वह समझती है कि इसके लिए किसी सिफारिश की जरूरत होती है। तो उसने कहा कि सिफारिश से लिया तो अवार्ड ही क्या लिया। जिस दिन मिलना होगा अपने आप मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि उसे तो सबसे बडे अवार्ड ख्याजा की जोगन से नवाजा जा चुका है जो उनके लिए सभी अवार्ड से बढ कर है।
रंगीली ने पिछले दिनों अवार्ड वापसी पर भी तंज कसते हुए कहा कि सम्मान को कोई कैसे लौटा सकता है। तोहफा कभी भी लौटाया नहीं जाता। किसी के द्वारा दिया गया मान सम्मान कोई छोटी चीज नहीं होती, जब आप को सम्मानित किया गया है तो आप का ही सम्मान बडा हो गया, अब आप वापिस लौटा कर यह कहना चाहते हैं कि उनको गलती से सम्मानित समझ लिया गया।
मुख्य अतिथि देरी से आए
खचाखच भरे टाउनहॉल में जब परवीन रंगीली के आने के बावजूद आठ बजे तक कार्यक्रम की शुरूआत नहीं की गई तो श्रोता एक बारगी भडक उठे। उन्होंने टाउनहॉल के मुख्य द्वार पर मुख्य अतिथि मेयर घनश्याम ओझा का इंतजार कर रहे अकादमी के सचिव महेश पंवार से कार्यक्रम जल्दी शुरू करने व मेयर साहब का बहिष्कार करने का कहने लगे। इस पर रंगीली को स्टेज पर बुलाया गया, व किसी अन्य वीआईपी से उनका स्वागत कराया गया। हालांकि अगले पंद्रह मिनट बाद मेयर साहब भी पहुंच गए और उन्होंने परवीन रंगीली को गुलदस्ता भेंट कर उनका स्वागत किया। मेयर पहली कव्वाली के बाद उठ कर चले भी गए।
https://www.youtube.com/watch?v=TrbdvdOxU1k