चाहे पूजा करो या इबादत करो , दिल लगाने की लेकिन अदा एक है

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-हिन्दू महिला कव्वाल चंचल भारती ने पेश किये कौमी एकता और सूफियाना कलाम
जोधपुर।
कोई हिन्दू हो या मुसलमान हो, पालने वाला सबका खुदा एक है…चाहे पूजा करो या इबादत करो , दिल लगाने की लेकिन अदा एक है तथा कन्हैया की मुरली की तानों में वो, और मस्जिद की अजानों में जैसे कोमी एकता कलाम तथा हजरत आमिर खुसरो और साहिर लुधियावनी सहित अनेक जाने माने शायरों के सूफियाना और रूमानी कलामों की मंच से पेशकश हो रही थी। बुलंदगी की इन्तहा लिए जनाना आवाज में ये बंदगी पेश कर रही थी दिल्ली की महिला कव्वाल चंचल भारती। और मौका था राजस्थान संगीत नाटक अकादेमी की और से आयोजित छः दिवसीय संगीत समारोह का।
नातिया कॉलमों और सूफी गायकी करते हुए हजरत अमीर खुसरो के सूफिया कलाम कई कव्वालों ने पेश की है। लेकिन यह पहली बार है कि  साड़ी, ब्लाउज और चूड़ियां धारण किये एक हिन्दू महिला कव्वाल ने अपनी शास्त्रीय गायकी की ताकत के साथ छाप तिलक सब छीने जैसे सूफी गायन को कर्णप्रिय बना दिया। रचना के आरम्भ में अपने कोरस साथियों चाँद भारती और नसीर भारती के साथ जिस तरह का अलाप लिया वैसा अलाप बिरले ही सुनने को मिलता है।
भारती ने शेर ओ शायरी की प्रस्तुति करते हुए हालात के कदमो पे कलंदर नहीं गिरता, टूटे जो सितारा तो जमीं पर नहीं गिरता, गिरता है दरिया समंदर में, लेकिन दरिया में कभी समंदर नहीं गिरता। ये अजीब लोग है पहले हवाएं मांगते है, हवा चले तो पनाह मांगते है जैसे शेर पेश करते हुए श्रोताओं से दाद पायी।
भारती के साथ जहाँ चाँद व नसीर भारती ने हारमोनियम पर, इक़बाल भारती ने बेंजो पर, साकिर भारती ने तबले पर, अमृत भारती ने ढोलक पर, तथा ताहिर हुसैन अंदाज ने ऑक्टोपैड पर सांगत की ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देश के मशहूर संतूर वादक पियूष पंवार के साथ अकादमी सचिव महेश पंवार ने कलाकारों का स्वागत किया।
आज सुमन यादव का शास्त्रीय गायन
संगीत समारोह के तीसरे दिन बुधवार की शाम टाउन हॉल में जयपुर की कलाकार सुमन यादव शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति करेंगी ।