होमगार्ड्स को बडी राहत, ड्यूटी भत्ता पुलिस कानिस्टेबल के वेतन के समान देने के निर्देश

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-हाइकोर्ट ने सरकार की अपील आंशिक स्वीकार करते हुए 3 माह में  होमगार्डस का 30 दिन का ड्यूटी भत्ता पुलिस की एक माह के वेतन के समान बढ़ाने को कहा
जोधपुर
राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायधीश गोपाल कृष्ण व्यास व न्यायधीश जीआर मूलचंदानी ने राज्य सरकार की ओर से होमगार्ड के वेतनभत्ते पुलिस काॅनिस्टेबल के समान किए जाने के एकलपीठ की ओर से 12 मार्च 2015 को जारी आदेश को चुनौती देने वाली 32 अपीलों को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए उक्त आदेश को अपास्त कर दिया। लेकिन साथ ही सरकार को निर्देश जारी करते हुए इमरजेंसी जैसे हालात में पुलिस के समान ही पाॅवर के साथ काम करने वाले होमगार्ड्स के 30 दिन अर्थात करीब एक माह का ड्यूटी भत्ता पुलिस कानिस्टेबल को एक माह मे मिलने वाले वेतन के समान तीन माह के अंदर अंदर जारी करने के निर्देश भी दिए है।

खंडपीठ में एकलपीठ की ओर से 12 मार्च 2015 को जारी आदेश के खिलाफ अपीलें दायर करते हुए एएजी राजेश पंवार ने कहा कि यह आदेश राजस्थान होमगार्ड एक्ट 1963 व होमगार्ड नियम 1962 के खिलाफ है, क्यों कि होमगार्ड की नियमित नियुक्ति नहीं होती तथा उनको वालंटियरली ड्यूटी करने के लिए अवसर दिया जाता है। हां ड्यूटी के हिसाब से भत्ता दिया जा सकता है। एकलपीठ ने इस नियम की अनदेखी की।
एएजी पंवार के तर्क का विरोध करते हुए अप्रार्थी याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अंकुर माथुर, राजेन्द्र, बीएस तंवर तथा आरसी जोशी आदि ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न आदेशों का अवलोकन करने से यह सिद्ध होता है कि इमरजेंसी में ड्यूटी करते समय होमगार्डस को भी पुलिस के समान ही पाॅवर्स दिए जाते हैं। इस लिए समान कार्य के लिए समान वेतन के तहत नियमित वेतन श्रखला नहीं तो ड्यूटी भत्ता तो समस समय पर बढाया जा सकता हे।