विधानसभा सभा चुनाव: मतदान कल ईवीएम में बंद हो जाएगा प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला

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जोधपुर, 6 दिसंबर।

राजस्थान विधानसभा के लिए मतदान शुक्रवार को होगा। जोधपुर की तीनों विधानसभा सीटों सहित जिले की सभी दस विधानसभा सीटों के लिए मतदान की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मतदान सवेरे 8 बजे से शाम 5 बजे तक होगा और मतगणना 11 दिसंबर को होगी। जिले में कुल 2 हजार 532 मतदान केंद्रों में लगभग 3200 दल गठित किए गये है। मतदान शांतिपूर्ण संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के माकूल प्रबंध किये गये हैं। भौपू प्रचार समाप्त होने के बाद से सभी प्रत्याशी घर घर दस्तक देने में लगे हैं।

साथ ही सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार किया जा रहा है। कल पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सूर्यकांता व्यास, जोगाराम पटेल, बाबूसिंह राठौड़, अर्जुन लाल गर्ग, भंवर बलाई, गजेंद्र सिंह खींवसर, पब्बाराम विश्नोई सहित सभी प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला कल ईवीएम में बंद हो जायेगा। कांग्रेस और भाजपा दोनों बड़े दल अपनी अपनी जीत का दावा करने में लगे हैं। भाजपा जहां फिर से जीत के लिए जोर लगा रही है तो कांग्रेस अपनी जीत हासिल करने में लगी है। दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर नजर आ रही है।

जोधपुर राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। यहां की दस विधानसभा में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर है। हालांकि यह बीजेपी का गढ़ माना जाता है। पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत का क्षेत्र होने की वजह से बीजेपी सरकार आते ही जोधपुर को नजरअंदाज करने के आरोप लगते हैं।

जोधपुर को नजरअंदाज करने का आरोप:

बीजेपी की सरकार आते ही जोधपुर को नजरअंदाज किए जाने के आरोप लगे। बता दें कि जोधपुर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह जनपद है और वह 1998 में यहां की सरदारपुरा विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं। वह इस बार फिर यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला एक बार फिर भाजपा के शम्भूसिहं खेतासर से है।

ऐसा रहा अब तक का गणित:

2013 में बीजेपी को सदरपुरा सीट छोड़कर जोधपुर की 10 सीटों में से 9 सीटों पर जीत मिली थी। 2008 में कांग्रेस वापस सत्ता में आई, तब बीजेपी को दस सीटों में से छह पर जीत हासिल हुई थी। इस बार कांग्रेस के दस उम्मीदवारों में से सात उम्मीदवार ऐसे हैं जो पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं।

इन सात उम्मीदवारों में से तीन कांग्रेस परिवार के हैं। दिव्या मदेरणा ओसियां सीट से चुनाव लड़ रही हैं। वह महिपाल मदेरणा की बेटी और परसराम मदेरणा की पोती हैं। वहीं लूणी विधानसभा से कांग्रेस के उम्मीदवार महेंद्र बिश्नोई मलखान सिंह के बेटे और राम सिंह बिश्नोई के पोते हैं। कांग्रेस नेता खेत सिंह राठौड़ की बहू मीना कंवर शेरगढ़ से चुनाव लड़ रही हैं। कई लोग मानते हैं कि जिले में राजनीतिक लड़ाई लोगों की मांगों और जरूरतों पर भारी पड़ गई है।

स्थानीय उद्योगों में पत्थर की खदान, हस्तशिल्प, इस्पात, गौर प्रसंस्करण और कुछ हद तक वस्त्र शामिल हैं और ये सभी बेहतर सुविधाओं और अवसरों के लिए रो रहे हैं।शहर में पढ़ती हुई आबादी का सबसे बड़ा कारण पत्थर की खदानें हैं लेकिन इस मुद्दे को नजरअंदाज किया जा रहा है। इस क्षेत्र के किसानों ने अच्छे न्यूनतम समर्थन मूल्यों, फसलों की सरकारी खरीद और सिंचाई के पानी की मांग को लेकर कई बार आंदोलन किए हैं। यह रेतीला शहर है इसलिए यहां पीने के पानी की बहुत बड़ी समस्या है।

इसके अलावा लूणी और शेरगढ़ जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में भी पानी के लिए कई आंदोलन हो चुके हैं। यहां पर दस विधायकों में से दो राजपूत और दो जाट समुदाय के हैं। एक माली, ब्राह्मण, बिश्नोई और पटेल समुदाय के हैं। वहीं दो विधायक अनुसूचित जाति के हैं। सुरसागर विधानसभा सीट पर भाजपा की सूर्यकांता व्यास का कांग्रेस के अय्यूब खां व शहर विधानसभा सीट पर भाजपा के अतुल भंसाली का मुकाबला कांग्रेस की मनीषा पंवार के साथ है। वर्तमान में ये दोनों सीटें भाजपा के पास है।

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