शनि अमावस्या पर विशेष प्रयोगों से शनि की कृपा आसानी से मिल सकती है

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जोधपुर। शहर शनि अमावस्या आज पांच जनवरी को धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मनाई जाएगी। शनि मंदिरों में दिनभर तेलाभिषेक सहित कई अन्यबकार्यक्रम होंगे। इसके साथ ही दान-पुण्य पर भी जोर रहेगा। ज्योतिष गणना के अनुसार इस साल तीन शनि अमावस्या पड़ेगी। इस बार शनिबअमावस्या को लेकर कुछ विशेष योग बन रहे है। इस साल की पहली अमावस्या 5 जनवरी को है जो पौष माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या है। दूसरी शनि अमावस्या 4 मई को पड़ेगी। वह वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या है। तीसरी शनि अमावस्या 28 सितंबर को आश्विनी माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन पड़ेगी। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक न्याय के देवता शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनि अमावस्या का दिन सर्वोत्तम माना जाता है।

शनैश्चरी अमावस्या को शनि की पूजा-अर्चना, साधना के लिए महत्वपूर्ण, वांक्षित फलदायक माना जाता है। इस दिन शनिदेव के लिए कुछ आसान उपाय करने से शनिदेव की क्रूर दृष्टि का प्रभाव कम पड़ता है। शनिवार के दिन अमावस्या का पडऩा कई कारणों से काफी मायने रखती है। शनि ग्रह को सीमा ग्रह भी कहा जाता है, क्योंकि मान्यता के अनुसार जहां पर सूर्य का प्रभाव खत्म हो जाता है वहीं से शनि का प्रभाव शुरू होता है।
दो सौ साल पुराने शनिश्चर थान स्थित शनि मंदिर में कल शनि अमावस्या पर मेले सा माहौल रहेगा। शनिश्चर थान में अखण्ड ज्योति प्रज्ज्वलित है और यहां भगवान शनिदेव को उड़द से निर्मित इमरती मिठाई का भोग लगाया जाता हैं। शनिदेव की श्याम वर्णी प्रतिमा को मखाने, मावे तथा ऋतु पुष्प भी अर्पित किए जाते है। वहीं जोधपुर। प्रतापनगर पुलिस चौकी के सामने स्थित हनुमान शनिधाम मन्दिर में पांच जनवरी को शनि अमावस्या का उत्सव धूमधाम के साथ मनाया जाएगा।  पुजारी गोपाल महाराज ने बताया कि कार्यक्रम पंडित दामोदर भारद्वाज के सान्निध्य में होगा। कार्यक्रम का शुभारम्भ सुबह सवा नौ बजे ध्वजारोहण व गणपति पूजा से किया जाएगा। दिनभर तेलाभिषेक का

कार्यक्रम चलता रहेगा। मन्दिर पर आने वाले भक्तों को 23 हजार शनिमंत्रों से जाप की हुई शनि मुद्रिकाएं नि:शुल्क वितरित की जाएगी।
चांदपोल के बाहर भूतेश्वर वन खंड की सुरम्य पहाडिय़ों में स्थित अति प्राचीन सिद्ध स्थल मिनका नाड़ी की तपो भूमि पर शनि अमावस्या पर श्री श्रीविद्या अनुष्ठान केन्द्र के तत्वावधान में कालसर्प योग दोष से पीडि़त जातकों के कालसर्प योग दोष
निवारण के लिए पण्डित अशोक श्रीमाली द्वारा अति-विशिष्ट पूजन दोपहर बारह बजे करवाया जाएगा। प्रवक्ता भानु कुमार दवे ने बताया कि जिस किसी व्यक्ति की जन्मपत्रिका में कालसर्प योग दोष होता है उसके कार्य परोक्ष-अपरोक्ष
रूप से बाधित होते रहते है व व्यक्ति अपने जीवन में योग्यता जैसी उन्नति नहीं कर पाता है। बनते काम बिगड़ते है व सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं जैसी स्थिति जातक के जीवन में बनी रहती है। पूजन के लिए शनिअमावस्या का दिन विशेष फलदायी है। पूजनपूर्णतया आडम्बर रहित, गुरू परम्परा से प्राप्त गुप्त, दुर्लभ, प्राचीन, सिद्ध विधि एवं
मंत्रों से करवाया जाएगा।

 

 

रोजगार और नौकरी की समस्याएं आसानी से दूर हो सकती हैं

अमावस्या तिथि विशेष प्रभाव की तिथि मानी जाती है. इस दिन स्नान, दान और पूजा उपासना का विशेष महत्व होता है. अगर यह अमावस्या शनिवार को पड़ जाती है तो यह और भी फलदायी हो जाती है. शनि अमावस्या पर विशेष प्रयोगों से शनि की कृपा आसानी से मिल सकती है. ख़ास तौर से रोजगार और नौकरी की समस्याएं आसानी से दूर हो सकती हैं

इस दिन किस तरह करें शनि देव का पूजन?

– शनि देव की पूजा प्रदोष काल या रात्रि में करें.

– चाहें तो इस दिन व्रत भी रख सकते हैं.

– पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं.

– इसके बाद शनि चालीसा या शनि मंत्र का जाप करें.

– किसी निर्धन को खाने पीने की चीज़ों का दान करें.

– शनिदेव से कृपा पाने की प्रार्थना करें.

नौकरी या रोजगार पाने के लिए इस दिन क्या करें?

– सायंकाल पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं.

– इसके बाद “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जाप करें.

– एक काला धागा पीपल वृक्ष की डाल में बांध दें.

– इसमें तीन गांठ लगाएं.

जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए क्या करें?

– एक कटोरी में सरसों का तेल ले लें.

– उसमे बाएं हाथ की मध्यमा अंगुली डालकर शनि मंत्र का जाप करें.

– मंत्र होगा – “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः”

– सरसों के तेल को पीपल के वृक्ष के नीच रख दें.

साढ़े साती और ढैया से बचने का उपाय-

– एक लोहे का छल्ला ले आएं.

– उसे शनिवार की सुबह सरसों के तेल में डुबा कर रख दें.

– शाम को शनिदेव के मन्त्रों का जाप करें.

– उनकी विधिवत आरती करें.

– इसके बाद लोहे के छल्ले को बाएं हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण कर लें.

शनिदेव की पूजा में क्या-क्या सावधानी रखें?

– सरसों के तेल की बर्बादी न करें.

– निर्धनों की सेवा और दान जरूर करें.

– जहां तक हो सके आचरण उत्तम रखें.