वकीलों ने फिर किया न्यायिक कार्यों का बहिष्कार

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जोधपुर। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के आह्वान पर राजस्थान हाईकोर्ट
एडवोकेट्स एसोसिएशन और राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन से जुड़े
वकीलों ने मंगलवार को एक बार फिर न्यायिक कार्यों का बहिष्कार
किया। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रस्तावों का समर्थन करते हुए
उन्होंने पांच दिन के भीतर यह दूसरी बार हड़ताल की है। इससे पहले गत
गत 8 फरवरी को न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया गया था। वकील आज भी
हाईकोर्ट व अधीनस्थ अदालतों में पैरवी के लिए नहीं गए।
दरअसल बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अधिवक्ताओं, अधिवक्ताओं व पक्षकारों के
हितार्थ प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है। इन प्रस्ताव में वकील और
उनके परिवार के लिए 20 लाख रुपए तक का इंश्योरेंस कवर करना, हर तरह
की बीमारी का देश के अच्छे हॉस्पिटल में नि:शुल्क इलाज करवाना तथा
इसके लिए प्रत्येक वकील को स्पेशल कार्ड जारी करना शामिल है। इसके
अलावा नए अधिवक्ताओं को पांच साल तक हर महीने 10 हजार रुपए स्टाइपेंड के रूप
में देने तथा पुराने वकीलों के लिए पेंशन स्कीम लागू करने, एडवोकेट्स
प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने सहित विभिन्न प्रस्ताव भी है। इसके साथ ही एडीजे
सीधी भर्ती में वकीलों के लिए निर्धारित 25 फीसदी कोटे में ज्यूडिशियल
ऑफिसरों को भी शामिल करने के विरोध जताया गया है। इन प्रस्तावों
का समर्थन करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन व राजस्थान
हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन ने मंगलवार को न्यायिक कार्यों का स्वैच्छिक
बहिष्कार किया।
हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी व हाईकोर्ट
लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील जोशी ने बताया कि इन मांगों को लेकर
मंगलवार को कचहरी परिसर में प्रदर्शन भी किया गया। इसके बाद
हाईकोर्ट परिसर से संभागीय आयुक्त कार्यालय तक प्रोटेस्ट मार्च निकाला
गया तथा प्रधानमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। इस
दौरान एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सज्जनसिंह करनावत, महासचिव प्रहलादनसिंह
भाटी, सहसचिव गजेन्द्रसिंह तंवर, पुस्तकालय सचिव डिम्पल भाटी, कोषाध्यक्ष
बीरबलराम विश्नोई सहित कई अधिवक्ता उपस्थित थे।