अष्टमी और नवमी 13 को , निकलेगी शोभायात्रा, प्रशासन ने ली बैठक

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जोधपुर। चैत्र नवरात्र में इस बार दुर्गाष्टमी और रामनवमी महापर्व एक ही
दिन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। इस बार दुर्गाष्टमी और रामनवमी
एक ही दिन होने से देवी और राममंदिरों में एक साथ विशेष आयोजन होंगे। दो साल
पहले भी चैत्र नवरात्र में दुर्गाष्टमी व राम नवमी एक ही दिन मनाए गए थे। इस दिन देवी
मंदिरों में जहां कन्या पूजन व हवन होंगे वहीं मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जन्म पर
मंदिरों में बधाई गान होंगे और शोभायात्रा निकाली जाएगी।
दरअसल मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्म पुष्य नक्षत्र में हुआ था। इस बार
पुष्य नक्षत्र योग में ही रामनवमी महोत्सव का अनूठा संयोग होगा। यह योग चैत्र
नवरात्रा के आठवें दिन शनिवार को यानी 13 अप्रेल को होने से अष्टमी व नवमी
साथ-साथ मनाई जाएगी। अष्टमी के दिन ही सुबह 8.19 बजे से नवमी तिथि भी शुरू हो रही
है। यह अगले दिन सुबह 6.04 बजे तक रहेगी। भगवान श्रीराम का जन्म दोपहर बारह
बजे हुआ था। इसलिए पंडितों की नजर में इस दिन रामनवमी मनाया जाना ही
शास्त्र सम्मत माना जाएगा। 14 अप्रल को अगले दिन दोपहर बारह बजे श्रीराम की
जन्मोत्सव तिथि नहीं रहेगी इसलिए 13 अप्रेल को रामनवमी मनाई जाएगी, लेकिन भक्त नवमी
के नौ दिन के पाठ व व्रत पूरे होने पर 14 अप्रेल को नवमी मनाएंगे। ज्वारे का
विसर्जन नवमी और दशमी तिथि पर किए जा सकेंगे।
मेहरानगढ़ स्थित चामुंडा माता मंदिर में नवरात्रि के अंतिम दिन से पूर्व
होमाष्टमी पर 13 अप्रेल की रात हवन प्रारंभ किया जाएगा जिसकी पूर्ण
आहुति नवमी 14 अप्रेल को प्रात: 9:15 से 9.30 बजे के बीच में पूर्व नरेश
गजसिंह एवं हेमलता राज्ये द्वारा की जाएगी। नवमी को तिलक आरती दोपहर
12.05 से 12:15 के बीच होगी और दोपहर 12.15 से 12.30 के बीच थापनाजी के
उत्थापना का मुहूर्त होगा।
विश्व हिंदू परिषर द्वारा संचालित श्री रामनवमी महोत्सव समिति के तत्वावधान
में मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के प्राकट्य उत्सव रामनवमी पर 13
अप्रेल को शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस बार
शोभायात्रा में 311 से अधिक झांकियां शामिल होगी। विहिप के प्रान्त
अध्यक्ष प्रहलाद गोयल व महानगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने बताया कि 13 अप्रेल को
सुबह 10.15 बजे घंटाघर चौराहा से संतों के सान्निध्य में शोभायात्रा का
शुभारम्भ किया जाएगा। शोभायात्रा घंटाघर से श्रीराम दरबार
की पूजा-अर्चना व जन्मोत्सव के बाद रवाना होकर कटला बाजार,
खाण्डाफलसा, आडा बाजार, जालोरी गेट, सरदापुरा बी रोड होते हुए संत्सग
भवन पहुंचकर विसर्जित होगी।