तीसरी संतान के लिए मातृत्व परिलाभ मामले में सरकार को नोटिस जारी

288
-पहली संतान के विशेष योग्यजन हो जाने से कर्मचारी ने तीसरी संतान के लिए
गर्भधारण करने पर मातृत्व अवकाश मांगा जिसे नियमों का हवाला दे कर इनकार
कर दिया गया
जोधपुर
राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस संगीत लोढा व जस्टिस विनीत कुमार माथुर की
खंडपीठ ने पहले बच्चे के विशेष योग्यजन हो जाने पर सरकारी कर्मचारी
द्वारा तीसरी संतान के लिए मातृत्व अवकाश नहीं दिए जाने के नियम को
संविधान के विरूद्ध मानने वाली याचिका की सुनवाई में सरकार को नोटिस जारी
करते हुए जवाब तलब किया है। खंडपीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ता सनम बानो की
ओर से यूनियन आॅफ इंडिया के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई में दिए।
अधिवक्ता जीतेन्द्र पारासरिया ने पैरवी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता
सनम बानो केन्द्रीय विद्यालय संगठन में वर्ष 2009 में नियुक्त हुई,
उन्होंने 2010 में एक बालिका को जन्म दिया जो जन्म से ही देखने व सुनने
में असमर्थ थीं। फिर वर्ष 2012 में एक और संतान हुई जिसके लिए उनको दोनों
बार में मातृत्व अवकाश स्वीकृत किया गया। लेकिन चूंकि पहली संतान विशेष
योग्यजन होने के कारण तीसरी संतान की योजना बनाते हुए गर्भ धारण किया,
लेकिन इस बार सरकार ने केन्द्रीय सिविल सेवा छुट्टी नियमावली के नियम 43
। 1 । का हवाला देते हुए इनकार कर दिया गया।
संविधान के विरूद्ध
अधिवक्ता ने याचिका में उक्त नियम को संविधान के अनुच्छेद15।3। व
अनुच्छेद 42 जिसमें कामकाजी महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए वर्ष 1961
में पारित किया गया के विरूद्ध बताया। इस अधिनियम की धारा 27 के तहत कहा
गया है कि यदि कोई भी नियम मातृत्व लाभ अधिनियम के विरोधाभास में है तो
वह नियम विरोधाभासी रहेगा। यह नियम किसी तरह की सीमा भी निर्धारित नहीं
करता ।