अतिरिक्त सेशन न्यायालय, महिला उत्पीड़न प्रकरण ने कहा है कि गुजारा भत्ता दिलाने की मियाद गुजर जाने के बाद भी बककया वसूली की जा सकती है

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किसी कारण वश बकाया भरण पोषण भत्ते की वसूली के लिए मियाद गुजरने के बाद भी जो महिलाएं आवेदन पेश नही कर सकी है, उनके लिए अच्छी खबर है। प्रार्थिया राजलष्मी की ओर से पेश आवेदन जिसमे 16 हजार रुपये प्रति माह गुजरा भत्ता के हिसाब से पिछले चार साल से बकाया नही दिया है। इस आवेदन को पति धर्मेंद्र गहलोत ने यह कहते हुए एतराज उठाया कि भत्ता नही देने पर उसे दो बार जेल भेजा जा चुका है। अब 2012 के आदेश जे तहत फिर बकाया मांगा जा रहा है जो 1 साल की मयाद के बाहर है। इस पर अधिवक्ता हैदर आगा ने तर्क दिया कि पीड़ित पत्नी के लिए जरूरी नही की वहः बार बार आवेदन पेश करे। एक बार भत्ता देने के आदेश के बाद पति की जिम्मेदारी है कि पत्नी को नियमित भत्ता भुगतान करे। इस पर कोर्ट ने पति के एतराज को खारिज करते हुए भत्ता भुगतान के आदेश दिए।